पैजामे ऊपर होते जा रहे है,
दाढ़ियाँ नीचे आती जा रही है।
लोग टोपियाँ पहनते जा रहे है.
लोगोकों टोपियाँ पहनायी जा रही है।
माथे पर टीके लगते जा रहे है,
हवन कराए जा रहे है।
आखें बन होती जा है,
आखों पर पट्टियाँ लगायी जा रही है।
दोस्त मज़हब मैं बटने लगे है,
रंग मज़हब से जुड़ने लगा है।
इंसानोमें रंगोकी लकीर खींच कर,
इंसानियत पर कालीक पुताई जा रही है।
ख़बरें सच्चाई से दूर हो रही है,
झूठी खबरें सुनाई जा रही है।
रेप, मर्डर और दंगो की पीछे,
असली हालत छुपाई जा रही है।
दाढ़ियाँ नीचे आती जा रही है।
लोग टोपियाँ पहनते जा रहे है.
लोगोकों टोपियाँ पहनायी जा रही है।
माथे पर टीके लगते जा रहे है,
हवन कराए जा रहे है।
आखें बन होती जा है,
आखों पर पट्टियाँ लगायी जा रही है।
दोस्त मज़हब मैं बटने लगे है,
रंग मज़हब से जुड़ने लगा है।
इंसानोमें रंगोकी लकीर खींच कर,
इंसानियत पर कालीक पुताई जा रही है।
ख़बरें सच्चाई से दूर हो रही है,
झूठी खबरें सुनाई जा रही है।
रेप, मर्डर और दंगो की पीछे,
असली हालत छुपाई जा रही है।
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